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tera shahar

में कहानी में नया मोड़ भी ला सकता हूं  में तूझसे मिलने तेरे नये शहर भी आ सकता हूं अखिल यादव up

अहंकार

जितना तेरा अहंकार सब कुछ इधर ही रह जाएगा यह हुस्न भी तेरा सड़ जाएगा पैसा भी साथ नहीं लेजाएगा  अखिल यादव

सात जन्म

कई साल बीत गए चेहरा उसका देखे हुए एक धुंधली याद मुझे तंग करती रहती है दिल वो चीज जो जुड़ती नहीं जानते हुए भी तोड़ गई सात जन्म का वादा करके हांथ मेहंदी वाले जोड़ गई कहती हैं इस जन्म मुझे माफ करो लेकिन मैने तो खाना पीना सब तेरे साथ लिखा था भगवान से सिखबा क्या करना जान तू ही मुखड़ा मोड़ गई सात जन्मों का वादा करके हांथ मेहंदी वाले जोड़ गई जज

chahiye

ना तू मेरी ना मैं तेरा फिर किसका कौन बनेगा झूठे वादे करके गई इनको पूरा कौन करेगा अब भूले नहीं जाते वादे तेरे ज़ख्म हरे हैं इनको कौन भरेगा चल छोड़ दिया तूने मुझे पर मेरी कमी पूरी कौन करेगा हां मुझे पता है मेरे हिस्से का प्यार अब कोई और करेगा  अखिल यादव up

dost

प्यार मोहब्ब तो छोड़ो जनाब दोस्त भी आंख दिखाते हैं जहां साथ रहना चाहिए वहीं दूर भाग जाते हैं और और दोस्त दोस्त नहीं रहे बस मतलब के लिऐ याद करते हैं मुझे लगता है मेरे दोस्त बुरे है पर उनकी नजरों में हम भी तो उन्हे छोड़ कर चले जाते हैं बस इसी लिए लिखना सीखा है फाइलिंग अगर किसी को बताई तो चुतिया वाले टाइटल दिए जाते है  जनाब अब दोस्त भी आंख दिखाते हैं अखिल यादव up

तकदीर

दिल के करीब है तू किसी और के नसीब है मोहब्बत फिर भी तुझसे है लेकिन किसी और की तक़दीर है तू अखिल यादव

नज़र

उठती नहीं किसी और की तरफ नजर एक शख्स का दीदार मुझे इतना पाबंद कर गया  अखिल यादव